शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2014

बापू को पाती
व्यंग्य


आदरणीय बापू सादर प्रणाम
            आप के अच्छे दिन आ गये । स्वर्ग में आपको किसी ने बताया नहीं होगा कि आपके सपनों का भारत बन रहा है। भारत को स्वच्छ किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी झाड़ू लेकर निकल पड़े हैं। चमकता हुआ भारत आपको वहीं से दिख जायेगा । आपके दूसरे सपने भी जल्दी ही पूरे होंगे । आपने जो सपना देखा था कि ग्रामीण भारत आत्म निर्भर होगा । किसानों के पास व्यवसाय होगा । अर्थव्यवस्था गांव के भरोसे होगी शहरों के नहीं । उसकी दिशा में भी कदम उठा दिया गया है। स्मार्ट शहर बनाये जा रहे हैं। सौ शहरों को स्मार्ट बनाया जायेगा । गांवों को इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है । पहले इंटरनेट जायेगा फिर बिजली जायेगी । किसान जो साहूकारों और महाजनों के बोझ से दबा है । उसके खाते खोल दिये गये हैं बैक में । उन्हें एक लाख की बीमा दी जा रही है। अब किसान की आत्महत्या करने की स्थिति में उसका परिवार बेसहरा नहीं होगा । कोर्ट ने भी आत्महत्या को अपराध के दायरे से निकाल दिया है।
             आपका सपना था कि भगवान सबको सन्मति दे।  भगवान तो नहीं सब एक दूसरे को सन्मति दे रहे हैं। शंकराचार्य जी ने साई को मंदिरों से बेदखल कर दिया।  डांडिया और गरबा पर भी फतवे जारी हो रहे हैं। डांडिया खेलने वालों का धर्म देखा जा रहा हैं। लव जेहादा के नाम से एक हौआ उड़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी इन बातों को भी काफी गंभीरता से ले रहे है। आपके समरसता के सिद्धांत को भी समाज में लागू करने के लिए बोलेंगे जरूर । अभी चुपचाप चिंतन कर रहे हैं। आपको जानकर खुशी होगी कि आप जिस राष्ट्रभाषा हिन्दी की बात करते रहे । उस दिशा में भी प्रधानमंत्री जी ने कदम उठाया है। उन्होंने यु एन ओ में हिन्दी में भाषण दिया । मीडिया वाले गदगद हैं। हो सकता है कि प्रधानमंत्री जी शीघ्र ही यु पी एस सी की परीक्षाओं में हिन्दी की मांग पर भी बोलें । अभी तो ंिचंतनरत् हैं। उनके बदले में उनके मंत्री बोलते रहे । बापू आपको प्रसन्नता होगी कि उन्होंने खादी का कपड़ा खरीदने की वकालत की । प्रधानमंत्री जी का मानना है कि यदि एक व्यक्ति खादी खरीदेगा तो एक गरीब के घर में दिया जलेगा। उनकी सोच खादी के  प्रति जिनती नरम है । उतनी ही फुटकर व्यापार में विदेशी पूंजी के प्रति भी है। आपकी ही तरह वह भी शायद अपने को संसार का नागरिक मानते हैं। फुटकर व्यापार में सीधे पूंजी निवेश पर जोर देकर प्रधानमंत्री जी ने सबका मन जीत लिया है। चीन के राष्ट्रपति भी खुश होकर गये । अमेरिका के ओबामा भी मगन है। जापान वाले तो अभी तक मोदी जी को सपने में देखते हैं। विश्वनागरिक होने की राह पर निकल पड़े हैं। आपके सारे सपने शीघ्र ही पूरे होंगे । रविवार को आप चाहें तो ग्यारह बजे रेडियो पर उनकी बात सुन सकते हैं। अपने मन की बात करते हैं।
                                                            आपका
                                                            शशिकांत सिंह ’शशि’
                                                7387311701



साई बाबा का आवेदन शंकराचार्य के नाम
व्यंग्य


माननीय शंकराचार्य महोदय
       वाराणसी

विषय- मूर्ति स्थापना एंव पूजन की वर्जना हेतू धन्यवाद ज्ञापन

महोदय
     भारत के प्रमुख धार्मिक सांसद होने के नाते मेरे जैसे फकीर की प्रार्थना पर ध्यान दें । मुझे श्रीमान के द्वारा प्रेषित एक नोटिस मिली है जिससे ज्ञात हुआ है कि आपकी संसद ने मुझे मंदिरों से बेदखल कर दिया है। आपकी संसद ने अध्यादेश जारी किया है कि किसी भी मंदिर में मेरा पूजन नहीं किया जायेगा। मैं आभारी हूं । आपने वही किया है जो मैं कहता रहा था । आपके इस कार्य की सराहना करता हूं तथा आपके लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं । प्रार्थना करने का हक तो मुझे हासिल है ही क्योंकि इस बाबत किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार श्रीमान की ओर से नहीं किया गया है। यदि आप स्पष्ट कर सकें कि मैं हिंदू भगवान से प्रार्थना करूं कि मुसलमान अल्ला से तो कृपा होगी ।
         मैं श्रीमान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं कि कम से कम भारत भूमि पर रहने का हक मुझे आपने दिया है। आप सर्व शक्तिमान हैं । आप चाहते तो मुझे देश निकाले की सजा भी दे सकते थे । आखिर आप स्वतंत्र भारत के शंकराचार्य है। महोदय, मैं उन दिनों भारत में सक्रिय था जब यहां अंग्रजों का राज था । मैने वह दौर देखा है जब ंिहंदू और मुसलमान एक साथ मिलकर देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे । मैं तो फकीर आदमी हूं । गांव-गांव , गली-गली भटकता रहता था । किसी के घर का दाना मिल जाता ले जाकर पकाता और खाकर सो जाता । उन दिनों मुझे यह ख्याल ही नहीं आया कि मैं हिंदू हूं या मुसलमान । मैने श्रद्वा और संतोष से जीवन जीने के लिए लोगों से आग्रह किया । मुझे पता नहीं था कि आपके रूप में मेरा इतना बड़ा हितैषी इस भारत भूमि पर पैदा होगा । मैं उन सभी धर्म-संासदों का भी आभारी हूं जो अखाड़े के नाम से जाने जाते हैं । इन अखाड़ों ने अपना कीमती समय निकाला और मुझ जैसे नाचीज पर बहस की इसके लिए मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं । मैने सुना है कि समाज में दुराचार अपने चरम पर है। अकेली लड़की का घर से निकलना कठिन हो रहा है। आप सभी अखाडि़ये सांसदों ने इसके लिए भी जरूर जनचेतना अभियान चलाया होगा । आपने कम से कम हिंदू समाज को दुराचार के विरूद्ध; अवश्य ही चेताया होगा। उसकी खबर मुझ जैसे पाखंडी को नहीं मिली । राजनीतिक भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर है। जनचेतना भ्रमित है । आप संतों ने अवश्य ही इसे संज्ञान लिया होगा । जनचेतना फैलाने और उसे सुमार्ग पर लाने का प्रयत्न अवश्य ही किया होगा । आखिर जिस देश का अन्न आप बिना उपजाये खा रहे हैं । जिस देश की माटी में बिना पसीना बहाये रह रहे हैं । जिस समाज के चढ़ावे पर जिंदा हैं । उस समाज के प्रति इतने कत्र्तव्य तो आपको याद ही होंगे ।
         महोदय , आजीवन मैं नहीं जान सका कि मेरा धर्म मानवता के अलावा भी कोई है । आपने ज्ञात कर लिया । मैं हैरान हूं कि अचानक आपको मेरे प्रति इतना स्नेह कैसे उमड़ पड़ा । आपने मेरे आचार-विचार , आहार-विहार सब पर शोध कर डाला । यह शोध यदि इष्र्यावश है तो श्रीमान आपको सूचित कर दूं कि मैने कभी संचय की प्रवृति को प्रश्रय नहीं दिया । मेरे मंदिरों में जो अक्षय कोष जमा हो रहे हैं । उनके प्रति मेरी जिम्मेवारी नहीं है। मैने अपने जीवन में भिक्षावृति की । आज की सामग्री भी कल के लिए नहीं रखी।
       मैं देश की सरकार के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं जो तमाशबीन है। राजनीतिक संसद से भी बड़ी धर्म संसद बन गई है । अंत में, सभी अखाडि़ये धर्मसांसद देश में फैले तमाम अंधविश्वासों और समस्याओं के प्रति भाी इतनी एकता दिखायेंगे इसी आशा के साथ ।
                     

                                                                  आपका शुभचिंतक
                                                                       साईंनाथ


                                                              शशिकंात सिंह ’शशि’
                                                                                                skantsingh28@gmail.com
                                                                    7387311701

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

प्रलाप

                                      दुनिया आन लाइन
व्यंग्य



                  आज आप बैठे-बैठे एक किलक में सबकुछ आनलाइन प्राप्त कर  सकते हैं । सत-युग में जो काम बारह वर्षों तक एक टांग पर खड़े होने से होता था, वह काम अब एक किलक में ही संभव है।  आप आंखें बंद करके गुगल पर टार्इप कर दें । गुगल का सर्च इंजिन खुद संसार के किसी भी कोने से आपकी मनपसंद वस्तु ढ़ुंढ़ कर लायेगा । आप एक किलक करें और अपने डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का डिटेल देकर एडवांस बुकिंग करा लें । बुकिंग के बाद होम डिलिवरी हो जायेगी ।  नहीं । अरे नहीं साब !! एक बार में दाम देने की कोर्इ षत्र्त नहीं है । आप चाहें तो किष्तों में भी दे सकते हैं । डाउन पेमंट कर दीजिये केवल दस प्रतिषत और उसके बाद आप चाहें तो तीन महीने के अंदर  पेमेंट कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो गुगल महोदय आपके गांव की हवा और माटी भी मुफ्त में आनलाइन उपलब्ध करा देंगे ।
                      आपको हम रिष्तों के सेल की ओर ले चलते है। आप चाहें तो हर प्रकार के रिष्ते आन लाइन  मिल जायेंगे । पहले तो केवल वर-वधू के लिए ही रिष्ते चाहने वाले थे । अब तो हर प्रकार के रिष्तें आनलाइन मिल जाया  करते हैं ।  कर्इ बार लोगों को मां की जरूरत पड़ जाती है । विवाह जैसे अवसरों पर तो आज भी मां की जरूरत पड़ती है । दुनिया एकदम से तो सुधर नहीं जायेगी । आप यह फार्म संख्या दस भर दीजिये ।  आपको आपकी पसंद के अनुसार मां आन लाइन मिल जायेगी । बूढ़ी मां तो किसी को चाहिए नहीं । उसकी दवा-दारू का खर्च । दिन-रात की उंह-उंह और चिख -चिख । आपकी अपनी मां यदि अनपढ़ है तो गुगल पर पढ़ी-लिखी मां सर्च कीजिये मिल जायेगी । यदि आपकी मां देखने में माड नहीं हैं और आपका उठना बैठन बड़े लोगों में है तो षर्माने की जरूरत नहीं । आप गुगल पर स्मार्ट मां टाइप कीजिये  अनेक आपषन आ जायेंग । षादी -ब्याह के मौसम में डिमांड अधिक रहती है । आज भी जो अपने को भारतीय कहलाना गर्व की बात मानते है । उन्हें मां-बाप की जरूरत पड़ जाती है । कभी-कभी ऐसी परिसिथति भी बनती है कि आपके हैसियत के अनुसार मां-बाप नहीं हैं । तो आनलाइन बुकिंग करके भी मां-बाप जुटा लिए जातेहै। जरूरत खत्म होने के बाद पेमैंट करके उनसे मुकित मिल जाती है । असली वाले मां-बाप की तरह उनको भी हटाया जा सकता है । बूढ़े मां-बाप के लिए भी एक तरह से जाब आपषन ही है । आप को यदि बाप चाहिए तो वह भी मिल जायेगा । आन लाइन बाप भी मिल जाते हैं । मान लीजिये बच्चे का दाखिला कराना है । बाप के हस्ताक्षर चाहिए। हो सकता है कि आरिजनल बाप का आरिजनल मां से तलाक हो गया हो । तो बेचारा बच्चा क्या करेगा ? आनलाहन बाप की सुविधा  है । निर्भर करता है कि कितनी देर तक के लिए बाप चाहिए। बच्चे का सलाना जलषा है । उसमे ंपैरेंटस की उपसिथति चाहिए तो आनलाइन सुविधाये ली जा सकती हैं । जीवन भर के लिए तो बाप की जरूरत ही नहीं रहती । कमाऊ बाप मिलना मुषिकल है । मां की भी लगभग यहीं षत्र्तं हैं । दूध पिलाने वाली मां तो नही ंमिलेगी । अलबत्ता, विवाह में आषीर्वाद देने के लिए; बहू को मुंह दिखार्इ देने के लिए; बहू पूजन आदि के लिए मां की जरूरत हो तो उसे आन लाइन लिया जा सकता है । षादी-ब्याह के सीजन में तो आनलाइन बुकिंग होती ही रहती है । जीना मुषिकल हो जाता है । वैसे सच पुछिये तो  अपने बेटे -बहू को तो उनकी जरूरत होती नहीं है । रिटायर होने के  बाद तो अब पेंषन भी नहीं है जिसके लिए कोर्इ अपने बाप को अपने घर में रखे। बेकारी में अधेड़ लोगों को यह धंधा भी रास आ रहा है । कम से कम तीन चार महीने व्यस्त रहते है ं। अब यह उन्नसवी सदी का भारत तो है नहीं कि आदमी अपने पीछे एक कुनबा ढ़ोता चले ।
         और तो और ,साहब हो सकता है कि मरने के बाद किसी को रिष्तेदार की जरूरत पड़ जाये । मान लीजिये कि कोर्इ लावारिस मर गया तो समाज को कहां इतनी फुर्सत है कि कंधा देने के लिए आगे आयेगा । नाते -रिष्तेदार तो अब बचे नहीं । पास-पड़ोसी रह गये है । वह भी नाम के । किसी को यह नहीं पता कि पड़ोस में कौन रह रहा है ? लावारिस मरने पर बहुत खतरे हैं । नगरपालिका वाले तो ले ही जायेंगे । साथ ही पुलिस भी मरने के बाद चीड़-फाड़ करेगी । पोस्टमार्टम घर में तो इतनी बदबू आती है कि पुछिए मत । खैर मरने के बाद बदबू का खतरा तो नहीं है लेकिन आदमी षकून से अंतिम संस्कार को प्राप्त हो सके इसके लिए आनलाइन बुकिंग चौबीस घंटे खुली रहती है । कोर्इ भी चाहे तो अपना पूरा नाम-पता लिखाकर , अपने परिचय पत्र की एक कापी लगाकर आनलाइन भेज सकता है । यहां थोड़ी दिक्कत है । आनलाइन पेमेंट एडवांस में करना पड़ता है । ंआदमी यदि चाहे तो अपने पुत्र-पु़ित्रयो और नाते-रिष्तेदारों के पते दे सकता है । उन्हें बाद मरने के सूचना दी जा सकती है । यदि वे उचित समझेंगे और उपलब्ध होंगे तो आयेंगे । यदि आन लाइन पुत्र चाहिए तो उसकेी व्यवस्था भी कर दी जाती है । मुखागिन वगैरह तो अब दी नहीं जाती । इलैकिट्रक चिताओं में यही खासियत है कि अंदर डाल दीजिये । तुरंत स्वाहा। यदि फिर भी किसी के अंदर दसवीं सदी के संस्कार बचे हैं तो वह पेमेंट करके आन लाइन पुत्र की सेवायें ले सकता है । मुखागिन या असिथ-प्रवाह जैेसे कार्य वे कर देते है । बस पेमेंट एडवांस करना पड़ता है । अपने पुत्र को फुर्सत हो भी सकती है नहीं भी । आदमी मरने के बाद रिस्क क्यों ले ? आन लाइन पुत्र पर आप भरोसा कर सकते हैं । पेमेंट यदि आप एडवांस कर रहे है तो वे निषिचत तौर पर अपनी सेवायें देंगे ।
                अरे, नहीं साहब! यही बस  नहीं है ।  आपको आनलाइन तीज-त्योहारों की भी सुविधा भी मिलती हैं । आप चाहे तो दीवाली और दसहरा आन लाइन भी मना सकते हैं । हम आपके गांव की दीवाली तो नहीं दिखा सकते। यु एस ए और जापान की दीवाली दिखा सकते है। भारत के लोग जहां भी रहते है अपने त्योहार धूमधाम से मनाते हैं । अपना देष को छोड़कर दुनिया के हर कोने में रहना चाहते है और जहां भी रहते है अपने देष को नहीं भूलते । होली में तो रंगों की ऐसी धूम रहती है होनोलूलू में कि पुछिए मत । बिल्कुल र्इ-होली होती है । बच्चे आनलाइन रंग लगाते है । मोबाइल में आप एपस यदि डाल कर बैठे हैं तो कीचड़ाादि का भी आनंद ले सकते हैं। पर बड़ी बात यह है कि यदि आपको होली खेलने के लिए साथी की तलाष  है और वह नहीं मिल रहारही है तो आप आन लाइन बुकिंग कर दीजिये । आपके बताये गये पते पर आपका पार्टनर पहुंच जायेगाजायेगी । पेमेंट आप डिलिवरी के बाद भी कर सकते है । पार्टनर जो जायेगा उसे आप कितनी देर तक अपने पास रखना चाहतेे हैं । उसपर पेमेंट निर्भर करता है । हो सकता है कि आप उसके साथ होली न खेलें तब भी आपको पेमेंट करना पड़ेगा । यदि आपने कोर्इ बदतमीजी की तो उसका भुगतान आपको अलग से करना पड़ सकता है । दीवाली में मिêी के दीये पहले बनाये जाते थे । वह तो हम आपको आनलाइन भी मुहैया नहीं करा सकते । अब तो साहब यह देह ही माटी की बची  है । उसके अलावा तो कुछ है नहीं । यदि आप चाहें तो पिछली सदियों में बनाये गये मिêी के दीये आनलाइन देख सकते हैं ।  यदि आप गांवों की दीवाली देखना चाहें तो हम आपको दिखा सकते । बस हमारे पास गांव के किलीपिंगस अपडेट नहीं हैं ।
          भार्इ साहब ! तीज त्योहार तो वैसे भी आउट डेटेड चीजें हैं । उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए ।  इंतजार मत कीजिये ।  बुकिंग करा लीजिये । हमारी  बेवसाइट पर जाकर अपनी जरूरतों के अनुसार बुकिंग कर सकते हैं । हमारा बेवसाइट है-ूूूण्ेंइानबीण्बवउ । यदि आप चाहें तो हमें इमेल करके भी अपनी जरूरतों के अनुसार हमारी सेवायें ले सकते है । हमारा र्इमेल है -ेेंइेानबी420हउंपसण्बवउ । तो साब ! इस भागती हुर्इ दुनिया में इंतजार मत कीजिये कि कोर्इ आपकी बात सुनने के लिए खड़ा रहेगा । सबको जल्दबाजी है । यह दुनिया एक नहीं है । हर आदमी के अंदर एक दुनिया है और वह अपनी दुनिया में किसी और को आने ही नहीं देता । हम उपसिथत हैं आपकी सेवा करने को ।  आप आनलाइन हो जाइये । कोर्इ न कोर्इ आपको बुक कर लेगा । पेमेंट आफ्टर डिलिवरी । धन्यवाद ।
                                                       शशिकांत सिंह शशि